लगभग 90 फीसदी से अधिक गांवों में ग्राम प्रधान व सचिव शौचालय के नाम पर गरीबों से वसूल रहे दो दो हज़ार रुपये।

अब शौचालयों में खुलेआम भ्रष्टाचार, उपजिलाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक खामोश।


कालपी (जालौन) राहुल गुप्ता - तो खबर जनपद के समस्त गांवो से है, 80 फीसदी से अधिक ग्रामों में ग्रामीणों से खुलेआम शौचालय के नाम पर दो दो हज़ार रुपये की रकम वसूली जा रही है। सूत्रों से खबर है कि ग्राम प्रधानों व सचिवों की मिलीभगत से गरीबों का दोहन किया जा रहा है। भ्रस्टाचार के पैमाने पर ज़रा प्रकाश डालें तो 2g इस्पेक्ट्रम हो, चारा घोटाला हो, व्यापम घोटाला या कोई और ये बड़े घोटाले हैं, लेकिन ये उत्तरप्रदेश है जहाँ गरीबों के शौचालय तक को नही बक्सा जा रहा।
सरकारों द्वारा लागू की जाने वाली योजनाओं को हरी झंडी मिलते ही मानो नीचे से ऊपर तक बैठे भ्रस्टाचारियों की लॉटरी निकल पड़ती है। व हर नई योजना के बहाने काली कमाई का एक जरिया भी निकल आता है। बीते दिनों में गरीबों को कॉलोनी दिलाये जाने के नाम पर उन लोगों तक से 20 - 20 हज़ार रुपये ले लिए गए जिनको दो जून की रोटी जुटाने तक के लाले पड़े हैं, और जिसने नही दिए उसको कॉलोनी नही मिलेगी।

फिलहाल योगी आदित्यनाथ ने मेट्रो का उदघाटन किया था, व कल नरेंद्र मोदी बुलेट ट्रेन का शिलान्यास करेंगे। ये बड़े नेता हैं। कॉलोनी घोटाले व शौचालय घोटाले छोटे घोटाले हैं, लेकिन सवाल तो यह है कि 21वीं सदी में डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रहे भारत देश का सच तो इसी बात से उजागर हो जाता है कि अपने घर मे शौचालय बनवाएं, इस विज्ञापन में ही करोड़ों बहा दिए जाते हैं, और शौचालय के नाम पर आया पैसा बंदरबांट होकर जनता तक पहुँचता है व जिन जिन अधिकारियों तक इस बंदरबांट का कमीशन पहुँच जाता है वे कार्यवाही नही करते। फिर शिकायतें कितनी भी आएं,* *शिकायतीपत्रों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।*